पटना | बिजली कंपनी में 2000 पदों पर बहाली होगी। इसमें 800 पदों पर सामान्य विषय से स्नातक करने वाले आवेदन कर सकेंगे। इनके लिए सहायक, सहायक भंडार पाल और पत्राचार लिपिक के पद होंगे। अर्थशास्त्र व गणित से स्नातक करने वाले जूनियर अकाउंट क्लर्क के 250 पदों के लिए और इंजीनियरिंग करने वाले जेई इलेक्ट्रिक व सिविल के 400 पदों के लिए आवेदन कर सकेंगे। आईटीआई पास बटन पट चालक व जूनियर लाइन मैन के 600 पदों के लिए आवेदन कर सकेंगे। अकाउंट ऑफिसर के 20 और असिस्टेंट प्रोफेशनल ऑफिसर के 20 पदों पर भी भर्ती होगी। विज्ञापन अगले माह आएगा। आवेदन व परीक्षा ऑनलाइन होगी। साक्षात्कार नहीं होगा। 12 जुलाई 2018 सौभाग्य-प्रधानमंत्री सहज बिजली हर घर योजना नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के डॉ.पीजी नाजपांडे और एमए खान ने याचिका में कहा, बीपीएल कार्डधारकों और असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को 200 रुपए प्रतिमाह में बिजली दी जा रही है। एक जुलाई तक इनके बकाया बिजली बिलों को भी माफ किए जा रहे हैं। योजनाओं से बिजली वितरण कंपनियों का बजट पर प्रभाव पड़ेगा, और इसका खामियाजा आम उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ेगा, बिजली की दरें बढ़ेंगी और आम जनता को महंगी बिजली लेनी पड़ेगी, सरकार ने सिर्फ आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए ये योजनाएं लाई है| याचिकाकर्ता ने तर्क दिया गया है कि इसी तरह नि:शुल्क बिजली देने के खिलाफ 2003 में याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट की शरण ली थी। तब कोर्ट ने तत्कालीन सरकार को 100 करोड़ रुपए चुकाने के निर्देश दिए थे। इस निर्णय के अनुसार सरकार को बिजली कंपनियों को 5179 करोड़ रुपए जमा करने के बाद ही ये योजनाएं लागू करने का हक है। जबकि हाइकोर्ट ने 13 जुलाई 2018 को इस संबंध में दायर उनकी याचिका खारिज कर दी।  इसके पीछे राजनीतिक लाभ लेने की मंशा स्पष्ट है। लिहाजा, हाईकोर्ट को अग्रिम राशि जमा करवानी चाहिए थी। पूर्व में ऐसा किया जा चुका है। चूंकि हाईकोर्ट ने जनहित याचिका खारिज कर दी, अत: उस आदेश को पलटवाने सुप्रीम कोर्ट जाना पड़ा। इस बारे में जनहित याचिका खारिज होने के दिन ही घोषणा कर दी गई थी। उम्र सीमा: 35 साल प्रधानमंत्री सहज बिजली हर घर योजना सौभाग्य फ्री बिजली कनैक्शन ग्वालियर: 5 साल बाद अगस्त में 24 घंटे में 95.8 मिमी बारिश लिंक देखें 95% तक New Delhi Guides बीबीसी स्पेशल हरियाणा के बारे में Reply प्रवेश संरक्षण प्रयोगशाला Italy 4880804 Wind   (शरद खरे) सिवनी शहर का यातायात दुरूस्त करना, यातायात पुलिस के बूते की बात अब शायद नहीं रह गयी है। यातायात पुलिस के Ramdin Kumar | 17 August, 2018 8:22 PM के ई आर सी जरूरी सूचना ! मंदाकिनी घाटी में आग आरएसओपी फार्मों की सूची POPULAR NEWS THIS WEEK एसपी प्रवक्ता राजेन्द्र चौधरी ने बढ़ोतरी को आम जनता के साथ विश्वासघात करार देते हुए कहा कि पहले ही लोग महंगाई की मार झेल रहे हैं, अब बिजली के दाम बढ़ाकर बीजेपी सरकार ने सबकी कमर तोड़ दी है. वाराणसी में बस डिवाइडर से टकराकर पलटी, 5 गंभीर रूप से घायल दीपिका पादुकोण कैग ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि उत्तराखंड सरकार की महत्वाकांक्षी योजना थी कि वह अपनी जलशक्ति का उपयोग तथा विकास सरकारी तथा निजी क्षेत्र के सहयोग से करेगा। राज्य की जल-विद्युत बनाने की नीति अक्टूबर 2002 को बनी। उसका मुख्य उद्देश्य था राज्य को ऊर्जा प्रदेश बनाया जाय और उसकी बनाई बिजली राज्य को ही नहीं बल्कि देश के उत्तरी विद्युत वितरण केन्द्र को भी मिले। उसके निजी क्षेत्र की जल-विद्युत योजनाओं के कार्यांवयन की बांट, क्रिया तथा पर्यावरण पर प्रभाव को जाँचने तथा निरीक्षण करने के बाद पता लगा कि 48 योजनाएं जो 1993 से 2006 तक स्वीकृत की गई थीं, 15 वर्षों के बाद केवल दस प्रतिशत ही पूरी हो पाईं। उन सब की विद्युत उत्पादन क्षमता 2,423.10 मेगावाट आंकी गई थी, लेकिन मार्च 2009 तक वह केवल 418.05 मेगावाट ही हो पाईं। इसका कैग के अनुसार मुख्य कारण थे भूमि प्राप्ति में देरी, वन विभाग से समय पर आज्ञा न ले पाना तथा विद्युत उत्पादन क्षमता में लगातार बदलाव करते रहना, जिससे राज्य सरकार को आर्थिक हानि हुई। अन्य प्रमुख कारण थे, योजना संभावनाओं की अपूर्ण समीक्षा, उनके कार्यान्वयन में कमी तथा उनका सही मूल्यांकन, जिसे उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड को करना था, न कर पाना। प्रगति की जाँच के लिए सही मूल्यांकन पद्धति की आवश्यकता थी जो बनाने, मशीनरी तथा सामान लगने के समय में हुई त्रुटियों को जाँच करने का काम नहीं कर पाई, न ही यह निश्चित कर पाई कि वह त्रुटियाँ फिर न हों। निजी कंपनियों पर समझौते की जो शर्तें लगाई गई थीं उनका पालन भी नहीं हो पाया। जाहिर है, चीनी सरकार की जनरल एंटी-बिटकॉइन रुख जारी रहती है, जिनकी रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन की बिटकॉइन खनन सुविधाओं की सबसे बड़ी पनबिजली बिजली जल्द ही अतीत की बात हो सकती है। स्थानीय मीडिया। कैलेंडर 2018 Cashback on offer price: 1050 प्रॉपर्टी बाइंग टिप्स 3699035990खरीदे सफल इंडिया सिंदरी जुलाई से 200 रुपए महीने में बिल 1- नवकूपडगवैल/डगकमबोरवैल/केविटिपाइप बोरवैल योजना.. भारत के पीसी मार्केट में 28 फीसदी की ग्रोथ, अल्ट्रा स्लिम नोटबुक ने बढ़ाई मांग 51 mins VIDEO: पर्वतीय किसानों को हाईकोर्ट से तोहफ़ा, नॉन ज़ेड-ए ज़मीन पर मिलेगा हक चम्पावत accident - फोटो : graphic About Us |  Advertise with Us |  Terms of Use and Grievance Redressal Policy |  Privacy Policy |  Feedback |  Sitemap MPPSC PATNA : बिहार में बिजली कंपनी ने समाप्त हो रहे वित्तीय वर्ष के आखिरी दिन राजस्व संग्रह का बड़ा रिकार्ड हासिल कर लिया। पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में राजस्व संग्रह में 2200 करोड़ रुपए का इजाफा हुआ है। अब तक की यह सबसे अधिक बढ़ोतरी है। बिजली कंपनी के आला अधिकारियों का आकलन है कि अब अनुदान के भरोसे अपने घाटे की भरपाई करने वाली बिजली कंपनी मुनाफे के ट्रैक पर आ रही है। बगहा पूनम पाण्डे, नई दिल्ली शिवहर पंकज शर्मा Designed by : 4C Plus कृषि (25 एचपी से ज्यादा)- 5.70 - 5.60 Of India ภาษาไทย Mud Mud Ke Dekhta Hu October 29, 2017 team livecities आपका ज़िला 0 बिजली निगम के सुपरिटेंडेंट इंजीनियर मुकेश गुप्ता का कहना है कि यह माफी तभी मिलेगी जब वह एक साल तक नियमित तौर पर बिल अदा करते रहेंगे। अगर करोड़ों रुपये के बकाया बिल की रिकवरी हो जाती है तो शहर में पावर हाउस सहित बिजली लाइनों के की मरम्मत आसानी से हो सकेगी। राजस्व बढ़ने के साथ ही बिजली यूनिट भी सस्ती हो सकती है। इससे लोगों को गर्मी में पर्याप्त बिजली भी मिल सकती है। विभाग ने संकेत दिए हैं कि घाटे का सौदा लंबे समय तक सहन नहीं कर सकते हैं। रिमाइंडर के बाद बकाया वसूल नहीं होता है तो कनेक्शन काटने की प्रक्रिया पर विचार किया जाएगा। अगर कोई विभाग शर्त पर खरा नहीं उतरता है तो उसे इस स्कीम का फायदा नहीं मिलेगा। सरकारी विभागों पर करोड़ों के बकाया से पब्लिक पर गलत असर पड़ता है। केरल में प्रलंयकारी बाढ़: अबतक 324 लोगों की मौत, भारी बारिश की चेतावनी सहरसा न्यूज निचोड़ At 7PM: बेटी ने दी मुखाग्नि रिव्यू दैनिक भास्कर ऐप के साथ हमेशा अपडेट रहें। हिंदी में ताजा समाचार पढ़ने के लिए ऐप डाउनलोड करें हरियाणा के बारे में उत्तर प्रदेश में बिजली हुई महंगी(फोटो: BloombergQuint) सुशील कुमार निजी क्षेत्र की जल-विद्युत योजनाओं में भागीदारी के बारे में कई बातें कही गई हैं। नदी घाटियों का पूर्व अध्ययन, धरातल चित्र तथा जल का मूल्यांकन उत्तराखंड जल-विद्युत निगम को पहले से ही कर लेना चाहिए था ताकि नदी की बिजली उत्पादन क्षमता का सही अनुमान लगाया जा सकता। योजनाओं की बिजली उत्पादन क्षमता कई बार बदली गई 85 प्रतिशत योजनाओं में 22 प्रतिशत से 32.9 प्रतिशत बदलाव हुए, जिससे पूर्व अध्ययन के सही होने पर संशय तथा सवाल खड़े हो गए। योजनाओं को विकसित करने वालों ने व्यवस्था की त्रुटियों का फायदा उठाया। नमूने की 13 योजनाओं में एक की क्षमता 25 किलोवाट से कुछ कम की गई, ताकि उस पर रॉयल्टी कम देनी पडे, जो पूरे 25 किलोवाट या उससे अधिक पर काफी अधिक पड़ती। कई योजनाओं की समय-सीमा इसलिए बढ़ाई गई कि इस मामले में हुए नुकसान का भार उन पर न पड़े। यह अधिकतर उत्पादन क्षमता में बदलाव करने पर हुआ, जिससे राज्य की प्रत्याशित रायल्टी तथा बिजली से आमदनी में कमी आई। उससे राज्य को बहुत आर्थिक घाटा हुआ क्योंकि कंपनियों के प्रीमियम बदल गए। योजनाओं का समुचित पूर्व अध्ययन अत्यंत आवश्यक है ताकि उनकी क्षमता का सही ज्ञान हो सके। पानी के बहाव, विद्युत यंत्रों की कार्य क्षमता तथा अन्य बातों के मानक निर्धारित करने पर ही कंपनियों को लाइसेंस देने की नीति बनाने की जरूरत थी। इस लेख में कैग की पूरी रिपोर्ट, जिसमें राज्य की जल-विद्युत नीति तथा उसके काम करने के तरीके की कड़ी आलोचना है और जिसमें कहा गया है कि उस नीति के कारण बड़ा पर्यावरणीय तथा आर्थिक नुकसान हुआ है। सवाल यह उठता है कि सभी दिशाओं में बड़े घाटे तथा संसाधनों के क्षय के काम को राज्य सरकार क्यों प्रोत्साहन दे कर चला रही है ? इंडियन ऑयल के मुताबिक करीब 70 फीसदी लाभार्थियों ने एलपीजी चूल्हा और पहली बार गैस भरवाने के शुल्क के लिए ओएमसी से ब्याज रहित लोन लिया है. योजना के तहत हर बार गैस भरवाने पर सब्सिडी के तौर पर कटने वाली रकम से इस लोन को चुकाया जाता है. इसलिए 70 फीसदी उज्ज्वला योजना के लाभार्थी बाज़ार भाव पर सिलेंडर खरीदते हैं जब तक उनका लोन चुकता नहीं हो जाता है. बिजली स्विच करें - उसी दिन की सेवा बिजली स्विच करें - ऊर्जा प्रदायक चुनें बिजली स्विच करें - बिजली और गैस प्रदाता
Legal | Sitemap