टैरिफ सरलीकरण की अंतिम बैठक के दौरान राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कई तथ्य रखते हुए इन दोनों चार्ज को खत्म करन की मांग उठाई। परिषद अध्यक्ष ने बिजली के बिल से फिक्स चार्ज खत्म करने की भी मांग की। बैठक में नियामक आयोग के निदेशक टैरिफ डॉ. अमित भार्गव, निदेशक वितरण विकास चन्द्र अग्रवाल, एसोचैम सचिव बीएन गुप्ता समेत कई सदस्य मौजूद थे। पाकिस्तान: इमरान खान का शपथ-ग्रहण आज, तैयारियां पूरी संजीव रंजन उर्फ छोटू पासवान हमसे संपर्क करें: [email protected] 07-Apr-16 09:40 महानगर टाइम्स - August 18, 2018 महासचिव झारखंड प्रदेश तांती स्वासी कल्याण समिति How Super-Efficient BLDC Fans Can Reduce Electricity Bills by 65% सामान्य अध्ययन मॉडल प्रश्नोत्तर VIDEO: देहरादून के बीजेपी कार्यालय में 'वाजपेयी' को दी गई श्रद्धांजलि कर्नाटक                            100                 4.56 रुपए  एलसीडी डिस्प्ले एकल चरण इलेक्ट्रिक मीटर, छेड़छाड़ प्रूफ प्रीपेड पावर मीटर उजाला ITR फाइलिंग में फिर किया गया बदलाव सरसों (Mustard) दिशानिर्देश July 18, 2018 Library Profile पंजाब केसरी हिन्दी न्यूज की आधिकारिक वेबसाइट पर आपको न सिर्फ पल -पल की खबर मिलेगी बल्कि आप देख सकते हैं देश और दुनिया के वीडियो भी। क्योंकि हमारे पास है वीडियो और टैक्स्ट की खबरों के लिए एक हजार से ज्यादा रिपोर्ट्स का बड़ा नेटवर्क, जो आप तक सबसे पहले और तेजी से पहुंचा रहे हैं हर खबर। देश, दुनिया,खेल, व्यापार, बॉलीवुड और राजनीति से जुड़ी खबरों के अपडेट के लिए बने रहें पंजाब केसरी के साथ। जबलपुर। फीडर सेपरेशन, सिस्टम स्टेबलिंग सहित अरबों रुपए का काम लेने वाली नौ और कंपनियां बिजली कंपनी का काम छोड़कर भाग गई हैं। इससे पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी को तगड़ा झटका लगा है। बिजली कंपनी ने सभी कंपनियों को टर्मिनेट कर दिया है। इससे पहले जबलपुर सिटी सर्किल में डेढ़ अरब से भी ज्यादा का काम लेने वाली नई दिल्ली की यूबी कंपनी (जिसके कर्ताधर्ता विजय माल्या थे) ने अपना बोरिया बिस्तर समेटकर बिजली कंपनी को चूना लगाया था। संसद 6 7 8 9 10 11 12 चौकाने वाली बात तो यह है कि राज्य बनाने के पीछे एक बड़ा उद्देश्य राज्य के आदिवासियों का उत्थान करना था उसपर भी कोई ठोस पहल होती नजर नहीं आई। राज्य में आदिवासियों को जल-जंगल और जमीन से भी हाथ धोना पड़ा है और राज्य में जो आदिवासियों की संख्या है उसमें भी भारी गिरावट आई है। यही कारण है कि अब ट्रायवल एडवाइजरी काउंसिल ने राज्य का भ्रमण कर आकड़ों को जुटाने में लग गया है कि आखिर किस कारण से आदिवासियों की संख्या में कमी आ रही है। निजी क्षेत्र की जल-विद्युत योजनाओं में भागीदारी के बारे में कई बातें कही गई हैं। नदी घाटियों का पूर्व अध्ययन, धरातल चित्र तथा जल का मूल्यांकन उत्तराखंड जल-विद्युत निगम को पहले से ही कर लेना चाहिए था ताकि नदी की बिजली उत्पादन क्षमता का सही अनुमान लगाया जा सकता। योजनाओं की बिजली उत्पादन क्षमता कई बार बदली गई 85 प्रतिशत योजनाओं में 22 प्रतिशत से 32.9 प्रतिशत बदलाव हुए, जिससे पूर्व अध्ययन के सही होने पर संशय तथा सवाल खड़े हो गए। योजनाओं को विकसित करने वालों ने व्यवस्था की त्रुटियों का फायदा उठाया। नमूने की 13 योजनाओं में एक की क्षमता 25 किलोवाट से कुछ कम की गई, ताकि उस पर रॉयल्टी कम देनी पडे, जो पूरे 25 किलोवाट या उससे अधिक पर काफी अधिक पड़ती। कई योजनाओं की समय-सीमा इसलिए बढ़ाई गई कि इस मामले में हुए नुकसान का भार उन पर न पड़े। यह अधिकतर उत्पादन क्षमता में बदलाव करने पर हुआ, जिससे राज्य की प्रत्याशित रायल्टी तथा बिजली से आमदनी में कमी आई। उससे राज्य को बहुत आर्थिक घाटा हुआ क्योंकि कंपनियों के प्रीमियम बदल गए। योजनाओं का समुचित पूर्व अध्ययन अत्यंत आवश्यक है ताकि उनकी क्षमता का सही ज्ञान हो सके। पानी के बहाव, विद्युत यंत्रों की कार्य क्षमता तथा अन्य बातों के मानक निर्धारित करने पर ही कंपनियों को लाइसेंस देने की नीति बनाने की जरूरत थी। इस लेख में कैग की पूरी रिपोर्ट, जिसमें राज्य की जल-विद्युत नीति तथा उसके काम करने के तरीके की कड़ी आलोचना है और जिसमें कहा गया है कि उस नीति के कारण बड़ा पर्यावरणीय तथा आर्थिक नुकसान हुआ है। सवाल यह उठता है कि सभी दिशाओं में बड़े घाटे तथा संसाधनों के क्षय के काम को राज्य सरकार क्यों प्रोत्साहन दे कर चला रही है ? फेसबुक पर सरकारी योजनाएं प्राप्त करे सिलिगुडी टिहरी वातावरण की उपेक्षा की यह स्थिति थी कि खुदाई तथा सुरंग बनाने से निकला सारा मलवा खुलेआम नदी में डाला जा रहा था। योजना बनाने वालों ने किंचित भी परवाह नहीं की कि ऐसा करने से पानी दूषित हो जाएगा तथा जल में रहने वाले जीवों की हानि होगी। जो वृक्ष या वन लगाने की बात योजना वालों ने की थी वह पूरी नहीं की गई। अड़तीस प्रतिशत योजनाओं ने कोई पेड़ नहीं लगाए, योजनाओं की सड़कें तथा सुरंगें बनाने से पहाड़ों के ढलानों को नुकसान हुआ। इन सब बातों का प्रतिकूल प्रभाव नदियों के नीचले भागों में पड़ा। नीचे के जल प्रवाह की माप होनी चाहिए थी तथा उसके मानदंड बनाए जाने चाहिए थे ताकि योजनाओं का वातावरण पर दुष्प्रभाव न पडे, उससे भूमिगत पानी का संचय हो रहा है या नहीं। सिंचाई के लिए क्या बचा पानी पर्याप्त है कि नहीं तथा नदी में कितनी बालू-मिट्टी जमा हो रही है ? यह देखा जाना चाहिए था कि योजनाओं के बनने के बाद पर्यावरण तथा प्रकृति पर क्या प्रभाव पड़ रहा है और उसकी लगातार समीक्षा होनी चाहिए थी। बिजली यंत्रों को चलने से यदि कोई दुष्प्रभाव पड़ रहा है तो उनके संचालन में बदलाव किया जाना चाहिए था। भारत सरकार के सुझावों के अनुसार एक प्रतिशत बिजली सरकार को सहायता के लिए मुफ्त दी जानी चाहिए थी। भाजपा नेता, चंदनकियारी थाना प्रभारी बलियापुर NCR पीसीबी यों का नियंत्रण विनियम पहला सवाल – लोगों के मन में अक्सर सवाल पैदा होता है की इस नई योजना का उद्देश्य क्या है? डेमो प‌िक दूसरे चरण के आवेदन 16-05-2017 से आगामी आदेश तक दिये जा सकते है। मुझे शिकायत है.. For Advertisement Query आगंतुक संख्या: जन सेवा जागरूक मंच अध्यक्ष, आम आदमी पार्टी युवा मोर्चा महानगर अध्यक्ष अब नोटबंदी से पहले बैंक में नगदी जमा करने वाले इनकम टैक्स विभाग के रडार पर Shine.com FACEBOOK यह भी पढ़ें: ‘सबके लिए बिजली’ योजना में मुफ्त बिजली नहीं 11 वीं योजना परियोजनाएं इस योजना के लिए कुल 43 हजार 33 करोड़ के निवेश की आवश्यकता है। जिसमें से भारत सरकार (योजना की पूरी अवधि में) 33 हजार 4 सौ 53 करोड़ की सहायता देगी। निजी डिस्कॉम एवं राज्य बिजली विभागों समेत सभी डिस्कॉम इस योजना के तहत वित्तीय सहायता के लिए पात्र होंगी। डिस्कॉम विशिष्ट नेटवर्क जरूरत को ध्‍यान में रखते हुए ग्रामीण ढांचागत कार्यों को मजबूत बनाने को वरीयता देंगी और इस योजना के तहत आने वाली परियोजनाओं के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करेंगी। इस योजना को क्रियान्वित करने के लिए नोडल एजेंसी ग्रामीण विद्युतीकरण निगम (आरईसी) होगी। आरईसी,  योजना के लागू किए जाने की मासिक प्रगति रिपोर्ट को ऊर्जा मंत्रालय तथा केन्द्रीय विद्युत प्राधिकरण के समक्ष प्रस्तुत करेगी। इस रिपोर्ट में वित्तीय तथा वास्तविक प्रगति का ब्यौरा दिया जाएगा। छपरा में देंगे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार देश का सबसे लंबा… 1 Hours Ago बाहरी लिंक्स हमसे संपर्क करें आयुष दवाओं की सुरक्षा निगरानी बढ़ाने के लिये आयुष मंत्रालय की नई केंद्रीय योजनाAug 16, 2018 Tweets भारत में बिजली की कमी के बीच जानकार शंका जता रहे हैं कि जिस देश में बिजली की किल्लत है वहां बिजली की कार ज्यादा सफल नहीं होगी. लेकिन महिंद्रा को भरोसा है कि ये शंकाए बेवजह हैं. Tilak Nagar, New Delhi November, 2015 8.10             7.00  ड्यू डेट से पूर्व बिल पेमेंट पर 0.5% छूट 21st commonwealth games gold coast australia 2018 मुखिया, पिंड्राजोरा पंचायत Friday, 20 Jul, 9.35 pm छत्तीसगढ़ विद्युत नियामक आयोग ने बिजली की नई दरें घोषित कर दी हैं। उपभोक्ताओं के लिए ये दरें 1 अप्रैल से लागू हो जाएंगी। Menu असम यूनिवर्सिटी के चांसलर हैं गुलजार, देश के कई स्कूलों की प्रेयर बन गई उनकी रचना हमको मन की शक्ति देना 3 mins ज़ी स्पेशल खाता बनाएँलॉग इनविशेषखोजें रामनगर August 26, 2017 Binod Karan आपका ज़िला 0 Mud Mud Ke Dekhta Hu #अटल बिहारी वाजपेयी Promoted by 90 supporters Notifications Feedback| सड़क पर हार्मोनियम बजाता है ये शख्स, 'इंडियन आइडल 10' के जज नेहा-विशाल ने दान किए 1-1 लाख रुपये रायपुर. चुनावी साल में सभी को खुश करते हुए छत्तीसगढ़ सरकार ने बिजली की दरों में औसतन 22 पैसे प्रति यूनिट की कमी की है। यह कमी घरेलू, गैर घरेलू, औद्योगिक और अन्य सभी वर्ग के उपभोक्ताओं में बांटी गई है। यानी हर वर्ग के टैरिफ में कमी की गई है। उद्योगों से लेकर हाई वोल्टेज उपभोक्ताओं को भी राहत देने की कोशिश की गई है। नई दरें 1 अप्रैल 2018 से लागू होंगी। छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत विनियामक आयोग ने बिजली की औसत दर (औसत लागत के आधार पर पावर कंपनी की दर) को 6.44 रुपए प्रति यूनिट से घटाकर 6.22 रुपए किया है। इससे बिजली कंपनी के राजस्व में 531 करोड़ रुपए की कमी आएगी। नयी दर लागू होने से एक उपभोक्ता को 200 यूनिट मासिक बिजली इस्तेमाल करने पर अब करीब 1215 रुपये चुकाने होंगे. वर्तमान दर पर वह 690 रुपये चुकाता है. इस तरह उस पर करीब 525 रुपये मासिक का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा. आयोग के अध्यक्ष अरविंद प्रसाद ने बताया : आयोग ने 200 यूनिट तक के लिए ग्रामीण क्षेत्रों  में बिजली दर प्रति यूनिट 1.25 रुपये से बढ़ा कर 4.40 रुपये कर दिया है.  शहरी क्षेत्र में सभी उपभोक्ताओं के लिए 5.50 रुपये प्रति यूनिट तय कर दिया  है. वर्तमान में शहरी क्षेत्र के उपभोक्ताओं को 3.60 रुपये प्रति यूनिट  देना पड़ता है.  परावैद्युत अपना शहर चुनें Created at - December 23, 2016, 1:28 pm Register Free Login English Send OTP राज्य विद्दुत युटीलीटियों की छठी एकीकृत रेटिंग ऊर्जा संरक्षण खेल7 लेख के अनुसार, बिजली कंपनियों के बयान से खनिकों की सामान्य भावना को प्रतिबिंबित नहीं होता है। खनिकों का मानना ​​है कि बिटकॉइन के संचालन 'त्याग किए गए पानी' का उपयोग कर रहे हैं - पानी जो बिना बिजली के उत्पादन के चलते जाते हैं, यही वजह है कि मूल्य काफी कम है। बिजली का नया कनेक्शन 300 रुपये तक सस्ता हुआ दिल्ली कांग्रेस दफ्तर में शीला दीक्षित, अजय माकन, हारून यूसुफ, अरविंदर लवली, सज्जन कुमार और महाबल मिश्रा समेत कई पूर्व विधायक और सांसदों की बैठक हुई. सीखें जरा : गोठ एप से जानिए कैसे हुनरमंद बन रही है बेटियां Tags:Bihar Electricity Regulatory Commission (BERC)Parmanand SinghPower Tariff पूर्व PM अटल बिहारी वाजपेयी का कल होगा अंतिम संस्कार मुख्यमंत्री बकाया बिजली बिल माफी स्कीम महीने भर के राजौरी Refrigerator 33 के.व्ही से अधिक वोल्टेज पर नवीन कनेक्शन हेतु विद्युत निरीक्षक द्वारा रेखाचित्र अनुमोदन तथा चार्जिंग अनुमति संबंधी नवीन सेवा को लोक सेवा प्रबंधन अधिनियम अंतर्गत शामिल करने की अधिसूचना। lCldzkbc कनेक्शनों की संख्या बढ़ाने के लिए किया फैसला जौनपुर ईंधन प्रबंधन प्रभाग त्वरित सम्पर्क हरियाणा सरकार की ‘पावर टैरिफ सब्सिडी योजना’ अब सुनिए "अखबार में कनपुरिया" अन्नू अवस्थी का हास्य अंदाज आदेश राज्य पंजाब-हरियाणा जम्मू-कश्मीर उत्तर प्रदेश हिमाचल गुजरात बिहार राजस्थान और कुल्लू अटल जी की 5 ऐसी खूबियाँ जिनकी वजह से वो हमेशा राजनीति के पटल पर अमर रहेंगे Oops, That’s an error! बिजली कंपनी के प्रस्ताव को विनियामक आयोग हू-ब-हू मान भी लेता है तो समग्रता में बिहार के लोगों को 10 फीसदी महंगी बिजली मिल सकती है. वित्तीय वर्ष 2018-19 के लिए विनियामक आयोग को सौंपे प्रस्ताव में कंपनी ने घरेलू, व्यवसायिक, छोटे व बड़े उद्योग, गरीबी रेखा से नीचे जीवन गुजर-बसर करने वाले कुटीर ज्योति और सिंचाई श्रेणी के उपभोक्ताओं को मिलाकर कुल 10 फीसदी वृद्धि का प्रस्ताव दिया है. लोग और जीवनशैली 15 शहरों में रिलांयस-बीपी करेगा घरों में गैस का वितरण, लाइसेंस लेने के लिए लगाई बोली UP: सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट डाली तो रासुक में गिरफ्तारी GST से क्या हुआ सस्ता और क्या महंगा पश्चिमांचल को छोड़कर पूरे प्रदेश में घरेलू और किसानों की बिजली सस्ती हो गई है। बिजली बिल पर लगने वाले रेग्युलेटरी सरचार्ज में विद्युत नियामक आयोग ने कटौती कर दी है। 151-300--4.95--5.40 # state Oneindia in Other Languages होमबिहार ये हैं नयी दरें... INDORE: रुपए के लालच में निर्वस्त्र हो गई महिला, तांत्रिक ने रेप किया | MP NEWS world Search News इंटरव्यू उपभोक्ता फोरम का फैसला, पावर निगम को रिटायर्ड इंजीनियर के बिलों में... संकल्प भारत सचिव जनन महाराष्ट्र के बिजली कंपनी ने सब्जी बेचने वाले को दिया 8 लाख का बिजली बिल, गरीब ने दे दी जान लेटेस्ट न्यूज़ रांची : झारखंड में बिजली उपभोक्ताओं को बड़ा झटका लगा है. विद्युत नियामक आयोग ने झारखंड बिजली वितरण निगम के प्रस्ताव पर नया टैरिफ निर्धारित कर दिया है. इसके अनुसार, राज्य में घरेलू बिजली 98 फीसदी तक महंगी हो गयी है. नयी दर एक मई से लागू कर दी जायेगी.  अधिसूचना पात्र उपभोक्ता Sep 26, 2017, 07:26 AM IST वैभव कुमार सिंह ट्रेंडिंग   केरल में बाढ़ की स्थिति गंभीर, पीएम का दौरा गुरुकुल गुजरात: एनडीआरएफ ने गोधरा नदी के बीच फंसे 12 लोगों को सुरक्षित निकाला। एक ऐसी लेब जहां सभी प्रकार की जांचें होंगी, मंत्री श्री जैन ने सेन्ट्रल पैथालॉजी लेब का शुभारम्भ किया 15/08/2018 दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना By embedding Twitter content in your website or app, you are agreeing to the Twitter Developer Agreement and Developer Policy. नीरज ने की थी मृत्यु की 'अटल' भविष्यवाणी, कहा था- एक महीने में दोनों छोड़ेंगे दुनिया अटल बिहारी वाजपेयी के शव को AIIMS से उनके घर ले जाया जाएगा वितरण प्रणालियाँ प्रभाग में उपलब्ध साफ्टवेयर सुविधाएँ - डीएसडी search बिजली कंपनियां दो तरह से बिजली खरीदती हैं। वह बिजली उत्पादक कंपनी से 10 या 20 साल के लिए लॉन्ग टर्म अग्रीमेंट करती है या फिर जरूरत के मुताबिक शॉर्ट टर्म अग्रीमेंट होता है। यह पावर एक्सचेंज के जरिए या फिर बाइलेटरल (द्विपक्षीय) हो सकता है। जहां से बिजली मिल जाए वहीं से कंपनियां बिजली खरीद लेती हैं। अभी इस तरह का कोई सिस्टम नहीं है कि अगर बिजली कंपनी कम दाम पर बिजली खरीदे तो उन्हें कुछ फायदा हो। बिजली कंपनियां जिस दाम पर बिजली खरीदती है वह उसके खर्च में जुड़ जाता है और आखिरकार वह खर्च उपभोक्ताओं के हिस्से में आता है। अगर बिजली कंपनियां कम दाम पर बिजली लेंगी तो उपभोक्ताओं पर भी कम बोझ पड़ेगा। सूक्ष्म और लघु उद्यमों को सस्ती बिजली के लिए हरियाणा में ‘पावर टैरिफ सब्सिडी योजना’- Power Tariff Subsidy Yojna दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना और राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने लाइन लॉस का पूरा भार बिजली उपभोक्ताओं पर न डालने की वकालत की। उन्होंने ओडिशा का उदाहरण देते हुए कहा कि बिजली कंपनियों के घाटे के आधार पर जो रेग्युलेटरी सरचार्ज लगाया जाता है। उसका 50 प्रतिशत हिस्सा उपभोक्ताओं और 50 प्रतिशत हिस्सा बिजली कंपनियों को देना चाहिए। ताकि बिजली कंपनियों की लापरवाही का खामियाजा ईमानदार उपभोक्ताओं पर न पड़े। गोल्ड कॉन्टेस्ट इसके अलावा बिहार और उत्तर प्रदेश से 33 केवी और 132 केवी रेडियल मोड में नेपाल को मामूली विद्युत का निर्यात करता रहा है। भारत नेपाल को 11 केवी, 33 केवी और 132 केवी लेवल पर 12000 से अधिक सीमापार इंटरकनेक्शनों के लिये लगभग 190 मेगावाट विद्युत का निर्यात कर रहा है। 2016 में 400 केवी लाइन क्षमता (132 केवी क्षमता के साथ संचालित) मुजफ्फरपुर (भारत)-धालखेबर (नेपाल) के चालू हो जाने के बाद नेपाल को विद्युत निर्यात में लगभग 145 मेगावाट की वृद्धि हुई। मीटर निरंतर नैनीतालः बिना ताल बेसुर बेताल 18 अगस्त 2018 कोई जमा के साथ सस्ता बिजली - विद्युत छूट कोई जमा के साथ सस्ता बिजली - ऊर्जा प्रदाता बदलें कोई जमा के साथ सस्ता बिजली - विद्युत कैलकुलेटर
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