Storyboard Copyright and Usage Last updated: Thu, 22 Mar 2018 06:41 AM IST मीडिया कर्मी पेंशन योजना के लिए आवेदन करें India Result 2018 अंतर्राष्ट्रीय विंडएनर्जी एक्सपर्ट ओपी तनेजा कहते हैं कि इससे पहले भी विंड एनर्जी का रेट 3.46 रुपए प्रति यूनिट से घटकर 2.64 रुपए प्रति यूनिट हो गया था। फिर भी बिजली कंपनियों ने बिजली खरीद में रुचि नहीं ली। मनोरंजन सिंह # कोयला कंपनी किस कांग्रेस नेता ने अटल बिहारी के पार्थिव शरीर के सामने जमीन चूम ली ? विमानन कंपनियां बहुत ज्यादा किराया नहीं वसूल रहीं: DGCA Specials | Aug 13, 2018 जुलाई से 200 रुपए महीने में बिल लखनऊ Firkee राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य योजनाएँ (एन पी पी) राजनीति बिजली-सड़क-पानी क्राइम अन्य ख़बरें दिल्ली टाइम्स ईपेपर CHURDHAR INNOCENT MISSING MP News in Hindi चंदन शास्त्री अन्य विभाग सरल बिल योजना 1 जुलाई से शुरू हो रही है। इसका फायदा जिले के 1.25 लाख ग्राहकों को होगा और उन्हें सस्ते में बिजली मिलेगी।... अरबिंद शर्मा राशिफल: जानें कैसे रहेंगे 18 अगस्त को आपके सितारे Get Lucknow News, Breaking news headlines about Lucknow crime, Lucknow politics and live updates on local Lucknow news. Browse Navbharat Times to get all latest news in Hindi. Download Our Android App Cricket News in Hindi रांची : झारखंड में बिजली उपभोक्ताओं को बड़ा झटका लगा है. विद्युत नियामक आयोग ने झारखंड बिजली वितरण निगम के प्रस्ताव पर नया टैरिफ निर्धारित कर दिया है. इसके अनुसार, राज्य में घरेलू बिजली 98 फीसदी तक महंगी हो गयी है. नयी दर एक मई से लागू कर दी जायेगी.  More From News आजादी के 71 साल बाद भी कुपोषण से हर साल होती है 3000 बच्चों की मौत प्रतापगढ़ घरेलू सिलेंडर 66 रुपए महंगा GST से क्या हुआ सस्ता और क्या महंगा ध्वनि प्रदूषण (विनियमन और नियंत्रण) नियम, 2000 न्यूज़ एनालिसिस अगर राज्य का आकलन सही तरीके से किया जाए तो ना तो यहां बेरोजगारी की समस्या खत्म हुई है और ना ही पलायन का। यहां ना तो गरीबी खत्म हुई है और ना ही जीवन जीने के तरीकों में कोई सुधार हुआ है। स्वास्थ्य और शिक्षा के हालात पर हर दिन बहस हो रही है। स्मार्ट बनिए आ रही DIWALI में, अपने Love Bird को दीजिए Diamond Jewelry कुमारी श्रीति पांडेय साइट इं.ए 7 अथवा ऊपरवाले में 1024 x 768 रेसोल्‍युशन, मोजि़ला 3.5 अथवा ऊपर, गूगल क्रोम 3 अथवा ऊपरवाले में बेहतर देखा जा सकता है। चकल्लस इंटरनेट संसाधन उन्होंने बताया कि जिन इकाइयों को उद्यम प्रोत्साहन नीति 2015 की अधिसूचना अर्थात 15 अगस्त,2015 को या उसके बाद बिजली कनेक्शन जारी किया गया है, वे 14 अगस्त, 2020 तक पावर टैरिफ सब्सिडी के लिए पात्र होंगी। उन्होंने कहा कि ‘सी’ और ‘डी’ श्रेणी खंडों में स्थापित ऐसे सूक्ष्म एवं लघु उद्योग इस योजना के लिए पात्र होंगे, जिन्होंने पोर्टल https://udyogadhaar.gov.in पर संबंधित जिला उद्योग केंद्र के साथ उद्योग आधार ज्ञापन (यूएएम) फाईल किया है। साइट का नक्शा राजौरी उद्योग जगत Home > राज्य > बिजली बिल के भार से दबा उपभोक्ता और बिजली कंपनी की रैंकिंग पहुंची 31वें स्थान पर निविदायें बीते कुछ वर्षों में बिजली कंपनियों ने विद्युत उत्पादन कर रही कंपनियों से महंगी दरों पर बिजली खरीद की, जिसके चलते करोड़ों रुपए का अतिरिक्त भार कंपनियों पर पड़ा है। वहीं अब घाटे और वित्तीय भार की भरपाई कंपनियां प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं से कर रही हैं। प्रदेश में राष्ट्रीय औसत से ज्यादा दरों पर हो रही बिजली खरीद बिजली कंपनियों के संचित घाटे को बढ़ा रही है वहीं छीजत और चोरी रोकने में नाकाम रही बिजली कंपनियों ने घाटे की भरपाई बिजली उपभोक्ताओं पर डालने की कार्यशैली अपना ली है।  मुख्यमंत्री मनोहर लाल का कहना है कि हरियाणा में पहली बार बिजली कंपनियां लाभ में आई हैं। उनके लाइनलॉस भी कम हुए हैं। हम अब प्रदेश की जनता को सस्ती बिजली देंगे। इसकी घोषणा करने से पहले मैंने बिजली कंपनियों से कहा है कि वे उत्पादन प्रभावित न होने दें। इसके लिए यदि कोयले की जरूरत है तो आवश्यक प्रबंध और बातचीत करें। हम नहीं चाहते कि बिजली सस्ती करने की घोषणा कर दें और समुचित आपूर्ति न कर पाएं। हमारी सरकार बिजली भी सस्ती देगी और आपूर्ति भी पूरी देगी। हमेशा कनेक्टेड रहें वर्तमान ख़बरें/ 0 ऑडिट (लेखा परीक्षा) की समय पर तैयारी करनी चाहिए। टॉपर्स कॉपी मेसेज देख हुई लड़ाई, दूसरी मंजिल से गिरी विवाहिता सालों बीत जाने के बाद भी अफसरशाही को यह मालूम नहीं, HC ने की थी ग्रीन एरिया में निर्माण की मनाही July 17, 2018 DW के बारे में अंतर्कलह से जूझ रही भाजपा-कांग्रेस को चुनाव में झटका दे सकती है ये तीसरी पार्टी Rojgar Mela अनुसंधान और विकास मेनू बदल रेलयात्रियों से वसूली जा रही दोहरी कीमत, मांगने पर भी नहीं दिखाते रेट लिस्ट कैग ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि उत्तराखंड सरकार की महत्वाकांक्षी योजना थी कि वह अपनी जलशक्ति का उपयोग तथा विकास सरकारी तथा निजी क्षेत्र के सहयोग से करेगा। राज्य की जल-विद्युत बनाने की नीति अक्टूबर 2002 को बनी। उसका मुख्य उद्देश्य था राज्य को ऊर्जा प्रदेश बनाया जाय और उसकी बनाई बिजली राज्य को ही नहीं बल्कि देश के उत्तरी विद्युत वितरण केन्द्र को भी मिले। उसके निजी क्षेत्र की जल-विद्युत योजनाओं के कार्यांवयन की बांट, क्रिया तथा पर्यावरण पर प्रभाव को जाँचने तथा निरीक्षण करने के बाद पता लगा कि 48 योजनाएं जो 1993 से 2006 तक स्वीकृत की गई थीं, 15 वर्षों के बाद केवल दस प्रतिशत ही पूरी हो पाईं। उन सब की विद्युत उत्पादन क्षमता 2,423.10 मेगावाट आंकी गई थी, लेकिन मार्च 2009 तक वह केवल 418.05 मेगावाट ही हो पाईं। इसका कैग के अनुसार मुख्य कारण थे भूमि प्राप्ति में देरी, वन विभाग से समय पर आज्ञा न ले पाना तथा विद्युत उत्पादन क्षमता में लगातार बदलाव करते रहना, जिससे राज्य सरकार को आर्थिक हानि हुई। अन्य प्रमुख कारण थे, योजना संभावनाओं की अपूर्ण समीक्षा, उनके कार्यान्वयन में कमी तथा उनका सही मूल्यांकन, जिसे उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड को करना था, न कर पाना। प्रगति की जाँच के लिए सही मूल्यांकन पद्धति की आवश्यकता थी जो बनाने, मशीनरी तथा सामान लगने के समय में हुई त्रुटियों को जाँच करने का काम नहीं कर पाई, न ही यह निश्चित कर पाई कि वह त्रुटियाँ फिर न हों। निजी कंपनियों पर समझौते की जो शर्तें लगाई गई थीं उनका पालन भी नहीं हो पाया। लोक शिकायत Tuesday, 17 Apr, 10.11 am प्रिया की तरह एक वीडियो से छा गया MP का यह शख्स, देश भर में वायरल हुआ ... अधिक भारत की खबरें Published: Friday, August 10, 2018 12:19 PM    भोपाल हजारीबाग : प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना ने महिलाओं का बदला है... 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