फिट प्रदेश सरकार के दावे खोखले, मंडियों तक नहीं... news20 hours ago © Punjab Kesari 2018 इस फैसले के अनुसार शिवराज सरकार को वर्तमान में बिजली कंपनियों को 5179 करोड़ रूपए जमा करने के बाद ही इस योजना को लागू करना चाहिए। लेकिन हाईकोर्ट ने पिछले दिनों इस संबंध में दायर उनकी याचिका खारिज कर दी। राज्य सरकार के इस फैसले के पीछे चुनावी लाभ लेने की मंशा स्पष्ट है। लिहाजा, हाईकोर्ट को सरकार से इस योजना लागू करने के लिए अग्रिम राशि जमा करानी चाहिए थी। हाईकोर्ट द्वारा याचिका को खारिज करने के बाद नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच की उम्मीदें सुप्रीम कोर्ट पर टिकीं हैं। इन्हें भरोसा है कि उनकी याचिका दी गई दलीलों से सहमत होते हुए देश की सर्वोच्च अदालत उक्त आदेश को पलटेगी। About US सैंड आर्टिस्ट ने जुहू बीच पर भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी को... # Dehradun News Today डियर जिंदगी विशेष राज्यों के लिए केंद्र सरकार योजना का 85% अनुदान देगी, जबकि राज्यों को अपने पास से केवल 5% धन लगाना होगा और शेष 10% बैंकों से कर्ज़ लेना होगा। इन कई सालों में, आरएसओपी राज्य स्तरीय विद्युत उपयोगिताओं की प्रचालनीय तथा स्थानीय विशिष्ट समस्याओं का सामना करने हेतु मुख्य साधन के तौर पर विकसित हुआ है। इन कई पहलों में अनु एवं वि तत्व अपेक्षाकृत कम है । अतः किसी भी आरएसओपी परियोजना में औसत निवेश अधिक नहीं है । फिर भी इसमें उपयोगिता स्तर पर स्थानीय विशिष्ट समाधान खोजने के लिए अभिनव भावना को जिंदा रखा है । Embed Tweet Nai Dunia Advertise With US Back Top उन्होंने कहा कि बढ़ी हुई दरों के आदेश की प्रति मिलने पर सरकार सब्सिडी के संबंध में फैसला लेगी। गौरतलब है कि पिछले वर्ष विनियामक आयोग की अनुशंसा के बाद राज्य सरकार ने अलग-अलग स्लैब में सब्सिडी की घोषणा की थी। उपभोक्ता को उसके बिजली बिल पर कितने रुपए की सब्सिडी दी जा रही है इसका जिक्र अब बिजली बिल पर अंकित रहता है। स्टडी मोटिव चौथा एक-दिवसीय अंतरराष्ट्रीय मैच Public Notices रजनी इस पोस्ट को शेयर करें Facebook उत्तर प्रदेश सरकार ने निकाय चुनाव के बाद राज्य में बिजली की दर बढ़ाने का फैसला किया है। विपक्षी पार्टियों ने सरकार के इस फैसले का विरोध किया है। देखिए सबसे बड़ा मुद्दा... HSSC Food Supply Sub Inspector Admit Card, Syllabus & Notes pdf यूं ही नहीं मैं 'अटल' कहलाता हूं, तस्वीरों में देखिए निधन से पंचतत्व में विलीन होने तक का अंतिम सफर बिजली आपूर्ति में सुधार के सपा सरकार के लम्बे-चौड़े दावे, इसी सरकार के अन्य सभी वादों व दावों की तरह ही कागज़़ी व हवा-हवाई साबित होते हुए साफ़ तौर पर लोगों को दिख रहे हैं। इतना ही नहीं बल्कि ’’अपराध-नियंत्रण व क़ानून-व्यवस्था एवं जनहित व विकास’’ के मामलों में वर्तमान सपा सरकार का रिकार्ड जितना ज़्यादा खऱाब व दयनीय है। आमजनता की राय सपा सरकार के प्रति जितनी ज़्यादा खराब है, उतना ही खऱाब स्थिति बिजली की उपलब्धता के मामले में भी हैं। अटल जी के जाने के बाद लोग अब चर्चा कर रहे हैं कि शायद अटल जी नहीं होते तो झारखंड भी नहीं होता। जानकार बताते हैं कि अटल जी जब कभी झारखंड का दौरा करते या यहां के नेताओं के साथ बातचीत करते तो झारखंड (वनांचल) का जिक्र जरुर करते थे। वर्ष 1991 में रांची में एक चुनावी सभा में उन्होंने कहा था कि और जैसे ही उन्हें प्रधानमंत्री बनने का मौका मिला, अलग राज्य की घोषण कर दी। उत्पादन क्षमता पिंटू दत्ता अविनाश कुमार उत्पादों वाजपेयी के निधन पर पीएम -उपराष्ट्रपति समेत कई राजनेताओं ने जताया शोक msn समाचार संपत्ति-समर्थित सुरक्षा (एबीएस) के ऊपर लिखी गई इस रिपोर्ट में कहा है कि किफायती हाउसिंग क्षेत्र में कुल नॉन परफॉर्मिंग एसेट (एनपीए) में सितंबर 2017 तक 1.8 फीसदी की वृद्धि हुई है. जिब्राल्टर स्टॉक एक्सचेंज को बिटकॉइन इनवेस्टमेंट प्रोडक्ट की सूची वीडियो न्यूज़ OMG पश्चिमांचल को छोड़कर पूरे प्रदेश में घरेलू और किसानों की बिजली सस्ती हो गई है। बिजली बिल पर लगने वाले रेग्युलेटरी सरचार्ज में विद्युत नियामक आयोग ने कटौती कर दी है। किसी मित्र को बताएं अंदरखाने दोनों की मिलीभगत है। इसका ताजा उदाहरण यह है कि बिजली कंपनियां ‘पावर परचेज एडजस्टमेंट चार्जेज’ के नाम से हर तीसरे महीने बिजली के दाम बढ़ाने के लिए दिल्ली विद्युत विनियामक आयोग (डीईआरसी) को प्रतिवेदन देती थीं। डीईआरसी बिजली कंपनियों के दावों के अनुसार हर तीसरे महीने बिजली के दाम चार फीसद से लेकर 14 फीसद तक बढ़ा देता था। पश्चिमांचल About Us | Privacy Policy | Contact Us | Feedback | Sitemap | RSS फुटबॉल बारहवां सवाल -. घरों के लिए प्रावधान क्या है जहां ग्रिड लाइनों को बढ़ाने के लिए यह संभव नहीं है? डीईआरसी चेयरमैन पी. डी. सुधाकर ने कहा कि अभी बिजली कंपनियां सस्ती बिजली खरीदने के कोई गंभीर प्रयास नहीं करती। हम ऐसा सिस्टम बनाना चाहते हैं कि अगर बिजली कंपनियां खर्च कम करती हैं तो उसका जो फायदा होगा उसका कुछ हिस्सा कंपनी को मिलेगा। वह एक तरह से बिजली कंपनी के लिए इंसेंटिव होगा। अभी ऐसा कोई इंसेंटिव नहीं है। हम चाहते हैं कि ऐसा हो। अगर वह मेहनत करके खर्च कम करते हैं तो उन्हें इसका इनाम मिले और इससे कंस्यूमर को भी फायदा होगा। Study Material | Test Series By Kamlesh Bhatt - बिजली बिल सरलीकरण कमेटी ने नियामक आयोग को सौंपी रिपोर्ट Have an account? Log in » Manoj Tiwari सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, चुनावी साल में सस्ती बिजली और बिल माफ करने का मामला चुनावी साल में बिजली का करंट घरेलू -1 ग्रामीण( मीटर) - 20 रुपये प्रति माह फिक्स चार्ज आज के रुझान  गृह मंत्रालय और प्रवर्तन कार्यपालक पदाधिकारी नगर पर्षद चक्रधरपुर वित्तीय वर्ष 2017-18 में सरकार बिजली उपभोक्ताओं  को करीब तीन हजार करोड़ रुपये की सब्सिडी देगी. मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार ऐसा पहला राज्य है, जिसने इस तरह का प्रयोग किया है. इसकी प्रशंसा केंद्र ने आधिकारिक रूप से की है. एक साल के अंदर उम्मीद है कि दूसरे राज्य भी इस पैटर्न को अपनायेंगे. उन्होंने कहा कि नये प्रावधान से राज्य में काम कर रही अलग-अलग कंपनियों की कार्यक्षमता का भी मूल्यांकन किया जा सकेगा.  Ram Badan Maurya‏ @1009711R Jun 4 राज्य शासन की ओर से बीपीएल उपभोक्तओं के बिल माफ करने की घोषणा से ही जून माह में बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं ने बिल जमा नहीं किए हैं। माफी योजना का लाभ लेने के लिए उपभोक्ता बिल जमा नहीं कर रहे हैं। विशेष विवरण: Photos10 Best deal to make unlimited calls to India @$5 for 1st month Google News in Hindi आर्टिकल एनालिसिस Read More.. दूतावास (Embassy) Photos for Class – Search for School-Safe, Creative Commons Photos (It Even Cites for You!) प्रदेश में बिजली हुई सस्ती, सरचार्ज खत्म अमेरिकी अखबारों ने की ट्रंप के मीडिया विरोधी बयानों की निंदा 162 पिपलियामंडी June 12, 2018 इससे पहले रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) ने फरवरी में बैंकों को निर्देश दिया था कि वे स्ट्रेस्ड लोन के मामलों को डिफॉल्ट के 180 दिनों के अंदर सुलझाएं। आरबीआई ने कहा था कि अगर ऐसा नहीं किया जाता है तो कंपनी को लोन रिजॉल्यूशन के लिए नेशनल कंपनी लॉ ट्राइब्यूनल (एनसीएलटी) ले जाना होगा। यह फैसला 2,000 करोड़ से अधिक के सभी लोन के लिए था। हालांकि, पावर सेक्टर को पावर परचेज एग्रीमेंट (पीपीए) साइन नहीं किए जाने, सरकारी अप्रूवल में देरी और कोयले की सप्लाई नहीं मिलने जैसी कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। सस्ता ऊर्जा - यहां अधिक जानकारी प्राप्त करें सस्ता ऊर्जा - विद्युत योजनाएं सस्ता ऊर्जा - विद्युत सौदे
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