-A A +A शिवराज पर आरोप, वोट बैंक को साधने के शुरू की गई सरल बिजली योजना Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करे... महिन्द्रा मराज़ो के डैशबोर्ड से जुड़ी जानकारी आई सामने, जानिए पालीमर प्रयोगशाला Tweets शेयर नियम और शर्तें सेहत जन्मदिन विशेष : भोजपुरी सिनेमा को पहचान दिलाने वाले रवि किशन… शिमला: देश में बिजली प्रोजैक्ट लगाने पर आने वाली लागत को कम किया जाएगा। निकट भविष्य में इससे देशभर के करोड़ों विद्युत उपभोक्ताओं को सस्ती दरों पर बिजली मिलेगी। केंद्रीय ऊर्जा राज्य मंत्री आर.के. सिंह ने कुफरी में आयोजित ऊर्जा मंत्रियों के सम्मेलन के दौरान कहा कि केंद्र सरकार इसके लिए नई पावर पॉलिसी बना रही है। सरकार जल्द नई पॉलिसी अधिसूचित कर लेगी। इससे हाईड्रो पावर पर लागत कम होगी। उन्होंने कहा कि फ्री-पावर, कैपिटल कॉस्ट, अवमूल्यन अवधि कम होने के कारण प्रोजैक्ट पर ज्यादा लागत आती है। इन सब बिंदुओं पर सरकार विचार कर रही है। दुनिया की सबसे खतरनाक सड़कें सराईकेला More Story बच्चे की तरकीब के मुरीद हुए आनंद महिंद्रा, करना चाहते हैं हा... झाविमो जिला अध्यक्ष Last updated: Thu, 22 Mar 2018 06:41 AM IST सराईकेला IBPS: बैंक में नौकरी चाहिए तो ये एक्सपर्ट टिप्स आएंगे काम पर्यावरण अजमेर में सेक्स रैकेट का खुलासा, ग्राहक और 3 युवतियां गिरफ्तार Games प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने से पहले इमरान ने अपने वतन से किए ये वादे लाइव सिटीज डेस्क, देवांशु प्रभात : भाजपा के राष्ट्रीय  अध्यक्ष अमित शाह आज रांची में हैं. भाजपा सरना और सदान पर फोकस के साथ मिशन 2019 की शुरुआत करने जा रही है. अमित शाह आदिवासी […] परिवहन और भंडारण के लिए तापमान रेंज सीमा -रेलवे ट्रेक्टशन को ओपन एक्सेस से 20 फीसदी लोड फैक्टर के खपत करने पर 30 फीसदी ऊर्जा प्रभार में छूट। # News कर्मचारी संगठनों ने किया स्वागत इस फैसले के अनुसार शिवराज सरकार को वर्तमान में बिजली कंपनियों को 5179 करोड़ रूपए जमा करने के बाद ही इस योजना को लागू करना चाहिए। लेकिन हाईकोर्ट ने पिछले दिनों इस संबंध में दायर उनकी याचिका खारिज कर दी। राज्य सरकार के इस फैसले के पीछे चुनावी लाभ लेने की मंशा स्पष्ट है। लिहाजा, हाईकोर्ट को सरकार से इस योजना लागू करने के लिए अग्रिम राशि जमा करानी चाहिए थी। हाईकोर्ट द्वारा याचिका को खारिज करने के बाद नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच की उम्मीदें सुप्रीम कोर्ट पर टिकीं हैं। इन्हें भरोसा है कि उनकी याचिका दी गई दलीलों से सहमत होते हुए देश की सर्वोच्च अदालत उक्त आदेश को पलटेगी। बांसवाड़ा : साधारण सभा में भी गुल रही बिजली, बोले ग्रामीण- बिजली आती नहीं, फिर भी थमा रहे हजारों का बिल अक्षय ऊर्जा सीखें जरा : गोठ एप से जानिए कैसे हुनरमंद बन रही है बेटियां हज़ारीब़ाग मेन्यू CM JAIRAM THAKUR ग्रामीण अनमीटर्ड कमर्शल उपभोक्ताओं को 1000 रुपये प्रतिमाह सिंचाई के लिए 100 के बजाए 150 प्रति बीएचपी मिलेगी। बिजली दरों में शहरी उपभोक्ताओं को 500 यूनिट से ऊपर 6.50 रुपए की दर से चार्ज देना होगा। शहरी उपभोक्ताओं को 150 यूनिट 4.90 रुपये की दर से मिलेगी वहीं शहरी उपभोक्ताओं को 150 से 300 यूनिट के बिजली 5.40 रुपये प्रतियूनिट की दर से मिलेगी । Water Heater 15 hours ago humaramandsaur #Sushant Singh Rajput कृषि निर्देशिका आधिकारिक सूचना के अनुसार, अगर गांव के कम से कम 10% घरों में विद्युत कनेक्शन प्राप्त होता है, तो गांव को विद्युतीकृत माना जाता है। अनुमान के मुताबिक, देश में 4.5 करोड़ ग्रामीण परिवार अभी भी बिजली के बिना रह रहे हैं। प्रधानमंत्री सौभाग्य योजना ‘उजाला’ योजना को भी बढ़ावा देगी जो कि कई ऊर्जा बचत उपकरण जैसे पंखे, एलईडी बल्ब और अन्य सेवाएं प्रदान करती है। संदेश Russian Русский फाजिल्का/फिरोजपुर बोकारो : भाई-बहन को बंधक बनाए रखने के मामले में... दीपिका रणवीर इटली में रचाएंगे ब्याह, मेहमानों को इस वजह से मोबाइल लाने की मनाही उन्होंने बताया कि 2011-12 निगम को करीब 345 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ। बोर्ड ने    English PK Studios 0 replies 0 retweets 2 likes कैग ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि उत्तराखंड सरकार की महत्वाकांक्षी योजना थी कि वह अपनी जलशक्ति का उपयोग तथा विकास सरकारी तथा निजी क्षेत्र के सहयोग से करेगा। राज्य की जल-विद्युत बनाने की नीति अक्टूबर 2002 को बनी। उसका मुख्य उद्देश्य था राज्य को ऊर्जा प्रदेश बनाया जाय और उसकी बनाई बिजली राज्य को ही नहीं बल्कि देश के उत्तरी विद्युत वितरण केन्द्र को भी मिले। उसके निजी क्षेत्र की जल-विद्युत योजनाओं के कार्यांवयन की बांट, क्रिया तथा पर्यावरण पर प्रभाव को जाँचने तथा निरीक्षण करने के बाद पता लगा कि 48 योजनाएं जो 1993 से 2006 तक स्वीकृत की गई थीं, 15 वर्षों के बाद केवल दस प्रतिशत ही पूरी हो पाईं। उन सब की विद्युत उत्पादन क्षमता 2,423.10 मेगावाट आंकी गई थी, लेकिन मार्च 2009 तक वह केवल 418.05 मेगावाट ही हो पाईं। इसका कैग के अनुसार मुख्य कारण थे भूमि प्राप्ति में देरी, वन विभाग से समय पर आज्ञा न ले पाना तथा विद्युत उत्पादन क्षमता में लगातार बदलाव करते रहना, जिससे राज्य सरकार को आर्थिक हानि हुई। अन्य प्रमुख कारण थे, योजना संभावनाओं की अपूर्ण समीक्षा, उनके कार्यान्वयन में कमी तथा उनका सही मूल्यांकन, जिसे उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड को करना था, न कर पाना। प्रगति की जाँच के लिए सही मूल्यांकन पद्धति की आवश्यकता थी जो बनाने, मशीनरी तथा सामान लगने के समय में हुई त्रुटियों को जाँच करने का काम नहीं कर पाई, न ही यह निश्चित कर पाई कि वह त्रुटियाँ फिर न हों। निजी कंपनियों पर समझौते की जो शर्तें लगाई गई थीं उनका पालन भी नहीं हो पाया। सोलन VIDEO VIRAL : वरमाला के समय हुआ कुछ ऐसा, दुल्हन ने जड़ दिया तमाचा सरकार के आदेश पर भारी कई मंत्री और अधिकारी, खोले रहे दफ्तर रिपोर्ट: गेरो रॉयटर/एएम IRCTC Train New Schedule, Timings: बदला गया 300 ट्रेनों का टाइम टेबल, जानिए नया शेड्यूल कैसे पहुंचें (लाइव सिटीज मीडिया के यूट्यूब चैनल को सब्सक्राइब करने के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.) पर्सनेलिटी डेवलपमेंट अविश्वसनीय क्रेग राइट एक बिटकॉइन ब्लॉकचैन साम्राज्य के निर्माण पर काम कर रहा है बीच चौराहे शरीर से निकाला जा रहा था जहर, बुजुर्ग की… प्रेजेन्टेशन यामाहा के YZF R15 बाइक का नया लिमिटेड एडिशन मॉडल लॉन्च सस्ता बिजली प्रदाता - शीर्ष ऊर्जा कंपनियां सस्ता बिजली प्रदाता - ऊर्जा प्रदाता सस्ता बिजली प्रदाता - इलेक्ट्रिक कंपनी प्रदाता
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