0 COMMENT तिवारी ने ये भी आरोप लगाया कि दिल्ली सरकार बवाना और अन्य गैस टर्बाइन से जुड़े बिजली उत्पादन पर भी ध्यान नहीं दे पा रही है. केजरीवाल सरकार "कोयले की भारी और जल्द ही दिल्ली में बिजली की किल्लत" की कहानी रच रही है. बीते तीन सालों के दौरान केजरीवाल सरकार ने सब्सिडी के तौर पर निजी बिजली कंपनियों के खजाने भरे हैं. अब उनके ही कहने पर ये प्रचार किया जा रहा है कि दिल्ली में ताप विद्युत का उत्पादन घट रहा है. ताकि निजी बिजली कंपनियों को नेशनल ग्रिड से सस्ती बिजली खरीदने में मदद मिले और उनका प्रॉफिट बढ़ जाए.   शासन और प्रशासन उदय योजना ने बिजली वितरण कंपनियों के नुकसान को कम किया है।  जब तीन महीने का एडवांस बिल लिया तो जमा क्यों नहीं किया? अंतरराष्ट्रीय खबरें रुड़की म.प्र. माध्यम बिजली कंपनी KEDL का विरोध : महिलाओं ने गुलदस्ता और धोवना दिखाकर की अधिकारियों से वापस जाने की मांग Log In 0:50 By Hussain Kanchwala on January 5, 2018 Total 0 search results found for %E0%A4%AC%E0%A4%BF%E0%A4%9C%E0%A4%B2%E0%A5%80 %E0%A4%95%E0%A4%82%E0%A4%AA%E0%A4%A8%E0%A5%80 Edited By म. प्र. पुर्व क्षेत्र विद्युत वितरण क. जन गण मन की बात, एपिसोड 289: अटल बिहारी वाजपेयी का राजनीतिक जीवन 250 से 300 रु. महीने तक का लाभ होगा Maharashtra Scheme वार्ड नं. 12 में समस्याओं का अंबार ಕನ್ನಡ पटनासाहिब को मिली दो विद्युत योजना : नंदकिशोर हालांकि कोई सरकार के दावें पर कैसे सवाल खड़ा सकता है, अगर इन दावों को सही भी मान लिया जाए तो गांव के विद्युतीकरण से गांववालों को कोई फायदा तो हुआ नहीं है क्योंकि विद्युत आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता की हालत बनी हुई है. अगर इन्हें 24 घंटे बिजली दी भी जाती है तो इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि गांव वाले इस बिजली का उपभोग करने में सक्षम होंगे. तेज Other Properties: और अधिक समाचारों के लिए अगले पेज पर जाएं, दोस्तों के साथ साझा करने नीचे क्लिक करें 9. विक्रम भट्ट की हॉरर फिल्म के दौरान कैमरे में कैद हुआ भूत, तस्वीरें देखकर उड़ जाएंगे होश शिक्षा विभाग के अपर सचिव पर हाईकोर्ट ने लगाया 5 लाख का जुर्माना Mahanagar Times 5.95             4.50 COPYRIGHT आर.ओ./ए.आर.ओ. हिंदीதமிழ்বাংলাമലയാളം मराठीENGLISH वातानुकूलक परीक्षण प्रयोगशाला वाजपेयी निमोनिया से पीड़ित थे, काम नहीं कर रहे थे कई अंग: चिकित्सक मेट्रो दिल्ली मुंबई लखनऊ ईएमसी/ ऊर्जा मीटर परीक्षण प्रयोगशाला अभिलेखागार By Hussain Kanchwala on March 26, 2018 ऐल्युमीनियम (ALUMINUM) डीईआरसी चेयरमैन पी. डी. सुधाकर ने कहा कि अभी बिजली कंपनियां सस्ती बिजली खरीदने के कोई गंभीर प्रयास नहीं करती। हम ऐसा सिस्टम बनाना चाहते हैं कि अगर बिजली कंपनियां खर्च कम करती हैं तो उसका जो फायदा होगा उसका कुछ हिस्सा कंपनी को मिलेगा। वह एक तरह से बिजली कंपनी के लिए इंसेंटिव होगा। अभी ऐसा कोई इंसेंटिव नहीं है। हम चाहते हैं कि ऐसा हो। अगर वह मेहनत करके खर्च कम करते हैं तो उन्हें इसका इनाम मिले और इससे कंस्यूमर को भी फायदा होगा। निजी क्षेत्र की जल-विद्युत योजनाओं में भागीदारी के बारे में कई बातें कही गई हैं। नदी घाटियों का पूर्व अध्ययन, धरातल चित्र तथा जल का मूल्यांकन उत्तराखंड जल-विद्युत निगम को पहले से ही कर लेना चाहिए था ताकि नदी की बिजली उत्पादन क्षमता का सही अनुमान लगाया जा सकता। योजनाओं की बिजली उत्पादन क्षमता कई बार बदली गई 85 प्रतिशत योजनाओं में 22 प्रतिशत से 32.9 प्रतिशत बदलाव हुए, जिससे पूर्व अध्ययन के सही होने पर संशय तथा सवाल खड़े हो गए। योजनाओं को विकसित करने वालों ने व्यवस्था की त्रुटियों का फायदा उठाया। नमूने की 13 योजनाओं में एक की क्षमता 25 किलोवाट से कुछ कम की गई, ताकि उस पर रॉयल्टी कम देनी पडे, जो पूरे 25 किलोवाट या उससे अधिक पर काफी अधिक पड़ती। कई योजनाओं की समय-सीमा इसलिए बढ़ाई गई कि इस मामले में हुए नुकसान का भार उन पर न पड़े। यह अधिकतर उत्पादन क्षमता में बदलाव करने पर हुआ, जिससे राज्य की प्रत्याशित रायल्टी तथा बिजली से आमदनी में कमी आई। उससे राज्य को बहुत आर्थिक घाटा हुआ क्योंकि कंपनियों के प्रीमियम बदल गए। योजनाओं का समुचित पूर्व अध्ययन अत्यंत आवश्यक है ताकि उनकी क्षमता का सही ज्ञान हो सके। पानी के बहाव, विद्युत यंत्रों की कार्य क्षमता तथा अन्य बातों के मानक निर्धारित करने पर ही कंपनियों को लाइसेंस देने की नीति बनाने की जरूरत थी। इस लेख में कैग की पूरी रिपोर्ट, जिसमें राज्य की जल-विद्युत नीति तथा उसके काम करने के तरीके की कड़ी आलोचना है और जिसमें कहा गया है कि उस नीति के कारण बड़ा पर्यावरणीय तथा आर्थिक नुकसान हुआ है। सवाल यह उठता है कि सभी दिशाओं में बड़े घाटे तथा संसाधनों के क्षय के काम को राज्य सरकार क्यों प्रोत्साहन दे कर चला रही है ? सालों बीत जाने के बाद भी अफसरशाही को यह मालूम नहीं, HC ने की थी ग्रीन एरिया में निर्माण की मनाही 2 जुलाई 2018 जूनियर टी-मेट, जूनियर हेल्पर पद के लिए अब इस दिन तक कर सकेंगे आवेदन कर्मचारियों की विवरणिका The page you are looking for cannot be found. चौपाल स्मार्ट बनिए आ रही DIWALI में, अपने Love Bird को दीजिए Diamond Jewelry सीआईसी वेबसाइट में वार्षिक रिटर्न भरना लेखक की संवेदना और विभाजन का दर्द बयां करती है... पॉल्यूशन फ्री है विंड एनर्जी Regional Party BJP NEWSWRAP: केरल में बाढ़ की तबाही, पढ़ें शनिवार सुबह की 5 बड़ी खबरें रन अप: शनिवार को जकार्ता में होगा एशियन गेम्स उद्घाटन समारोह मछली पालन लावारिस पशुओं से मुक्त नहीं हुआ पंचकूला, चादगोठिया पहुंचे कोर्ट लोकसभा टीवी डिस्कशंस अटलजी नकारात्मक सोच से हमेशा दूर रहे, उनके व्यंग्य पर लोग तिलमिलाते तो जरूर थे, पर आहत नहीं होते: लालकृष्ण आडवाणी 16 mins Energy Efficient Star Rated Power Inverters in India This Month : 18 Next : मंगलनाथ के पुजारी को कारण बताओ सूचना-पत्र जारी, आर्थिक अनियमितता की जांच बैठाई, जांच होने तक पूजा करवाना प्रतिबंधित रिमेक भी अच्छा दूसरे का दुःख बांटने का ही नाम है संगत पंगत : आर के सिन्हा शामली Username or Email Address Contact Us| स्‍थायी समिति के सदस्‍य दानिश रिज़वान ने की पटना जंक्शन का नाम अटल बिहारी वाजपेयी जंक्शन करने की मांग राजमहल लोकसभा सहित समस्त झारखण्ड वासियो को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक सुभकामना सीकर में सेक्स रैकेट का खुलासा, चार कॉलगर्ल्‍स समेत 13 गिरफ्तार जयपुर में देर रात झमाझम बारिश, मौसम हुआ ठंडा, सड़कों पर जगह-जगह भरा पानी   रायबरेली of India First India News से जुड़े अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करे! यात्रा एवं पर्यटन माइंड मैप Updated: August 17, 2018 07:08 PM IST हरियाणा के मंत्रियों ने दी पूर्व पीएम को... अन्नपुर्णा योजना Publish on March 22, 2018 Show — उपयोगी कड़ियाँ Hide — उपयोगी कड़ियाँ कृषि संबंधित जानकारी Notifications राज्य में 246 गांव हुए रोशन नौकरी/ जॉब्स Team अलका कुमारी आरसी ब्यूरो, औरंगाबाद।  बीजेपी शासित राज्य महाराष्ट्र में राज्य विद्युत वितरण कंपनी की लापरवाही की वजह से एक गरीब ने खुदकुशी कर ली। ये घटना महाराष्ट्र के औरंगाबाद की है, जहां महाराष्ट्र राज्य बिजली बोर्ड (एमएसईबी) ने भारत नगर इलाके में रहने वाले भागिनाथ शेळके को 8 लाख 64 हजार रुपये का बिजली का भेजा दिया। इसके साथ ही 17 मई तक ये बिजली बिल न जमा करने पर 10 हजार रूपये के जुर्माने की भी बात कही गयी थी। इससे परेशान इस शख्स ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। पुलिस के अनुसार भागिनाथ शेळके अपने परिवार का भरन पोषण सब्जी बेचकर करता था। लाखों के बिजली बिल से वो काफी तनाव में था। पुलिस ने बताया है कि मरने से पहले भागिनाथ शेळके ने एक नोट भी छोड़ा है।  इस नोट में उसने भारी-भरकम बिजली का बिल होने के कारण जान देने के लिए मजबूर होने की बात लिखी है। सस्ता बिजली प्रदाता - गैस तुलना सस्ता बिजली प्रदाता - इलेक्ट्रिक कंपनी स्विच करें सस्ता बिजली प्रदाता - विद्युत योजना की तुलना करें
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